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औरत

सोलह  श्रृंगार किये सजती सवरती ये  औरत
चेहरों पे चेहरे सजाती है यह औरत !!

संसार वाटिका में अति  उत्तम पुष्प ये  औरत
रुई सा ह्रदय लिए मन लुभाती है ये औरत !!

कुछ कहे बिना भी रह नहीं पाती ये औरत
पर जहन में कितने राज़ दफ़न करती है ये औरत !!

द्रढ पुरुष को भी भिक्षुक कर देती ये औरत
अत्यंत  विश्वसनीय और  अविश्वसनीय है ये  औरत !!

महान आघातों को क्षमा करती ये औरत
पर तुच्छ चोटों को नहीं भूलती है ये औरत !!

काव्य ग़ज़लों के पीछे चिपकी ये औरत
दूध में चीनी की तरह घुलती है ये औरत !!

जीव और सत्य के बीच माया बनी ये औरत
आँखों से उतरकर साँसों में समा जाती है ये औरत !!

जीवन भी अधूरा है नमो बिन ये औरत
तभी तो अर्धनारेश्वर का आधा अंग बनी है ये औरत !!
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