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जो चाहता है वो मिल गया तो भी क्या और ना मिला तो भी क्या ?


जो चाहता है 
वो मिल गया 
तो भी क्या ?
और ना मिला 
तो भी क्या ?
किले जीत लिए 
सम्राट हो गया
तो भी क्या ?
और दर दर का 
भिखारी ही रहा 
तो भी क्या ?
मौत की दस्तक
छीन लेगी तेरी 
सारी उपलब्धियाँ 
मिट्टी, मिट्टी 
में मिल जाएगा 
क्या कमाया 
और क्या गँवाया 
निर्मल जल भाँति 
पारदर्शी हो जाएगा 

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ये जुल्फें तेरी जब हवा से रूबरू होती

ये जुल्फें तेरी जब  हवा से रूबरू होती आँखों की नज़ाकत  मेरी रूह को छूती  बह जाता ये दरिया  तेरी खामोशियाँ जब  मेरी ख़ामोशियों से मिलती तेरा मेरा नाता है जैसे  बारिश में, सुनहरी  धूप की किरणें होती  ये जुल्फें तेरी जब  हवा से रूबरू होती आँखों की नज़ाकत  मेरी रूह को छूती  रूठना तेरा जैसे  नाराज़गी में भी  प्यार की इबादत होती  छोड़ दिए आज  मैंने ये गम सारे  लबो पर तेरे  खिलखिलाती जब  एक हंसी देखी  ये जुल्फें तेरी जब  हवा से रूबरू होती आँखों की नज़ाकत  मेरी रूह को छूती  भूल जाता हूँ सारी दुनिया  तेरी बातों से जब मेरे  दिल की बातें होती  मेरे प्यार से  वाक़िफ़ नहीं तू शायद  तेरे प्यार में भी वरना   वो सच्चाई होती  ये जुल्फें तेरी जब  हवा से रूबरू होती आँखों की नज़ाकत  मेरी रूह को छूती  *****

haa wo mera ek ehsaas ha

Haa wo mera ek ehsaas ha  Jisko shwanso me Mehsoos Kia maine  Wo maddham hasi uski Jaani pehchani si Sawan ki pehli barish si Apne me vyast,  Agyat thi woh  Ki mai piro raha tha Usko apni shwaaso mein Chanchal lehro si wo Meri kala me praan bharti prakarti niharoo ya usko  Dono ek hi baat thi  Wo chattan ke Shikhar si musafir mai neeche khada Wo Aseem akaash thi badal mai usme udta hua yeh nata kaisa usse jud gya Gehri saanso me bas gya Na hokar bhi wo mere paas ha Is wapasi k Safar me bhi Yaadein uski mere sath ha  Haa wo mera ek ehsaas ha Haa wo mera ek ehsaas ha In the memories of returning with you..!! Date - 13th Aug 2022 Kollam to Bangalore ****

काश कोई होती

काश कोई होती जिस पर कविता कभी गज़ल लिखते कोई खूबसूरत  हसीन  नाम जिसका कादंबरी कभी मुमताज महल लिखते निर्मल होता मन जिसका पावन पवित्र ऐसा कभी उसको नर्मदा कभी गंगाजल लिखते गहरी आंखें जैसे कोई सागर मंत्रमुग्ध करती उसको कभी झील का कमल लिखते बातें ऐसी जो  अस्तित्व भुला दे डूब कर उसके भावों में जीवन का हल लिखते साथ होता ऐसा जैसे रात में चांदनी भूल कर गमों को अपने साथ उसके अपना कल लिखते छुपा लेती मुझे बचा लेती मुझे जीवन की धूप से साए को उसके अपना आंचल लिखते झटकती सुखाती अपने बालों को ऐसी बरसात की घटाओं का रंग काजल लिखते नहा कर  उसके प्यार में सब पाप मिट जाते ऐसे यार को पहली बरसात का बादल लिखते कोई पछतावा न रहता जीवन में हार जाने का जब नाम उसके साथ अपना पागल लिखते उसकी हंसी को संगीत बना कर जीवन का गीत पल पल लिखते अब वो नही है तो हमे क्या खबर कि हम  क्या क्या लिखते। (मेरे यार कविकास की अधूरी रचना ) *****